जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से वर्ष 2050 तक हर साल करीब 4.3 लाख अतिरिक्त लोगों की मौत होने का अनुमान है। इनमें से लगभग 10 गुना अधिक मौत गरीब देशों में होंगी, जबकि अमीर देशों में यह संख्या काफी कम रहेगी। सोमवार को जारी ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए लोगों को ऊर्जा, खासकर ‘कूलिंग (ठंडक) के लिए जरूरी बिजली’ तक पहुंच मिलनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन इलाकों पर भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, वहीं के लोगों के पास एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और शिकागो विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ‘माइकल ग्रीनस्टोन’ ने कहा, “एयर कंडीशनर लोगों की जान बचा सकता है, और जलवायु परिवर्तन के कारण अमीर देशों में इसका इस्तेमाल निश्चित रूप से बढ़ेगा। लेकिन हमारी रिसर्च बताती है कि दुनिया के कई गरीब देशों के लोग ऐसा नहीं कर पाएंगे। यही जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है कि सबसे ज्यादा मौतें उन्हीं देशों में होंगी, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान दिया है।”
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